Thursday, 28 June 2018

सीरिया: रूस ने किए विद्रोहियों के इलाके में 25 हवाई हमले, 22 नागरिकों की मौत

बेरूत: दक्षिणी सीरिया के विद्रोहियों की पकड़ वाले इलाकों पर रूस की तरफ से एक के बाद एक किए गए हवाई हमलों में गुरुवार( 28 जून) को 22 असैन्य लोगों की मौत हो गई. एक निगरानी संस्था ने यह जानकारी दी. संस्था ने बताया कि मारे जाने वालों में से ज्यादातर लोग एक ही प्रांत के थे जो हमले की वजह से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ. सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स ने कहा, “अल-मसेफरा प्रांत पर कम से कम 25 रूसी हवाई हमले किए गए.’’ ब्रिटेन की इस संस्था ने बताया, ‘‘ इनमें से एक हमला एक बेसमेंट पर हुआ जहां लोग शरण लिए हुए थे.

इसमें पांच बच्चों समेत 17 असैन्य नागरिकों की मौत हो गई.” ऑब्जर्वेटरी ने कहा कि जिस प्रकार के विमानों और युद्ध सामग्री का इस्तेमाल हुआ, जिन स्थानों को चुना गया और लड़ाई के तरीकों को देखते हुए उसके आधार पर साफ होता है कि ये हमले किसने किए हैं. अन्य पांच लोग दक्षिणी सीरिया के मुख्य प्रांत दारा में मारे गए. इस इलाके पर भी विद्रोहियों का कब्जा है.

संस्था के प्रमुख रामी अब्देल रहमान ने कहा , “19 जून से इन हमलों के बढ़ने के बाद से यह पहला हमला है जिसमें इतने ज्यादा लोग मारे गए.” सरकारी बलों ने 19 जून से दक्षिणी सीरिया में विद्रोहियों की पकड़ वाले इलाकों में बमबारी बढ़ा दी है और सहयोगी रूस के लड़ाकू विमानों ने 23 जून को क्षेत्र पर पहला हमला किया था.

सीरिया: सरकार समर्थक बलों पर की गई बमबारी, 52 लड़ाकों की मौत
पूर्वी सीरिया में सरकार समर्थक बलों पर की गई बमबारी में मृतकों की संख्या बढ़कर 52 हो गई है. मृतकों में अधिकतर इराकी हैं. ब्रिटेन स्थित ‘ सीरियन आबजरवेट्री फॉर ह्यूमन राइट्स’ ने सोमवार (18 जून) को यह जानकारी दी. यह हमला रात में शुरू हुआ था. इस संस्था के प्रमुख रामी अब्दुल रहमान ने एएफपी को बताया कि मारे गये लोगों में 30 इराकी लड़ाके और 16 सीरियाई हैं. उन्होंने बताया कि शेष छह लोगों की अभी तक पहचान नहीं हो सकी है. सीरियाई सरकार द्वारा संचालित मीडिया ने हमले के लिए अमेरिकी अगुवाई वाले गठबंधन को जिम्मेदार बताया है. हालांकि उसने इससे इंकार किया है.

सीरिया में इराक से लगती सीमा पर हवाई हमला
ऑब्जर्वेटरी के प्रमुख रामी अब्देल रहमान ने कहा , “ सीरिया - इराक सीमा पर स्थित अल - हारी पर रातभर हुए हमलों में सरकार समर्थित मिलिशिया के 52 गैर सीरियाई लड़ाके मारे गए. ’’ सीरिया सरकार की मीडिया ने सेना के एक सूत्र के हवाले से इस हमले के बारे में रात में ही जानकारी दी और इसका आरोप इस्लामिक स्टेट से लड़ रहे अमेरिका नीत सैन्य गठबंधन पर लगाया.

मीडिया ने कहा कि इन हमलों में बड़ी संख्या में लोग मारे गए और घायल हुए हैं लेकिन उसने सटीक संख्या नहीं बताई. गठबंधन ने इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. ऑब्जर्वेटरी ने इस बात की तत्काल कोई जानकारी नहीं दी कि अल - हारी पर हुए हमलों को किसने अंजाम दिया.

Source:-ZEENEWS

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Tuesday, 19 June 2018

UNESCO के महानिदेशक ने की राइजिंग कश्मीर के संपादक शुजात बुखारी की हत्या की निंदा

लंदन: यूनेस्को के महानिदेशक ऑद्रे अजॉले ने वरिष्ठ पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या की मंगलवार (19 जून) को निंदा की और उम्मीद जताई कि प्रशासन उनके हत्यारों को पकड़ने और सजा देने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा. ‘राइजिंग कश्मीर’ के प्रधान संपादक बुखारी की 14 जून को श्रीनगर में उनके कार्यालय के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. उनकी सुरक्षा के लिए तैनात दो पुलिस अधिकारी भी इस हमले में मारे गए थे. सरकार ने इन हत्याओं के लिए कश्मीर में आतंकवादियों को जिम्मेदार ठहराया.

अजॉले ने एक बयान में कहा , ‘‘मैं शुजात बुखारी और उनके अंगरक्षकों की हत्या की निंदा करता हूं.’’ उन्होंने कहा , ‘‘मेरा भरोसा है कि अधिकारी हत्यारों को पकड़ने और उन्हें सजा देने में कोई कसर नहीं छोडेंगे.’’ संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन या यूनेस्को वैश्विक जागरूकता बढ़ाने, क्षमता निर्माण और कार्यों की एक श्रृंखला के माध्यम से पत्रकारों की सुरक्षा के लिए काम करता है.

गौरतलब है कि 14 जून को जब बुखारी अपने ऑफिस से एक इफ्तार पार्टी के लिए जा रहे थे तभी अज्ञात बंदूकधारियों ने उन पर हमला कर दिया था. रिपोर्ट्स के मुताबिक बुखारी की सुरक्षा में तैनात उनके निजी सुरक्षा अधिकारियों (पीएसओ) में से एक की भी इस हमले में मौत हो गई थी. हमले में एक अन्य पुलिसकर्मी तथा एक आम नागरिक भी घायल हो गया था.

Source:-ZEENEWS

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Monday, 18 June 2018

हवाला से जुड़े नोएडा प्राधिकरण के इंजीनियर बृजपाल चौधरी के तार, अब और कसेगा शिकंजा

नई दिल्ली/नोएडा: नोएडा प्राधिकरण के निलंबित सहायक परियोजना अभियंता बृजपाल चौधरी अस्पताल से मिली छुट्टी के बाद घर लौट गया है. लेकिन, उसकी मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं. बृजपाल चौधरी के तार हवाला से जुड़ते नजर आ रहे हैं. बृजपाल चौधरी की कैराना उपचुनाव में फंडिंग की संलिप्तता सामने आ रही है. ऐसे में जल्द ही आयकर की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय इस मामले में बृजपाल पर शिकंजा कस सकता है. आयकर विभाग की टीम ने फंडिंग के मामले पर कई चार्टर्ड एकाउंटेंट्स सहित कई लोगों से भी पूछताछ शुरू कर दी है. खबरों के मुताबिक, बेनामी संपत्ति की तलाश में जिन दस्तावेजों को जब्त किया गया है. उसमें हवाला के जरिए बड़ी रकम खपाने की बात कही जा रही है.

बृजपाल का पॉलिटिकल कनेक्शन
ये रकम कैराना उपचुनाव के दौरान गठबंधन सरकार की ओर इशारा कर रही है. इसको लेकर जांच अधिकारी भी आशंकित हैं. अभी तक इसे नोएडा प्राधिकरण के काले धन के इंजीनियर यादव सिंह से नहीं जोड़ा जा रहा था. लेकिन, इसके पॉलिटिकल कनेक्शन के जरिये ये बड़ा मामला बनता जा रहा है. ऐसे में जल्द ही इस मामले पर ईडी की टीम भी बृजपाल को निशाने पर लेकर पूछताछ कर सकती है. इससे न सिर्फ बृजपाल की, बल्कि उनके बेटे अंकुर चौधरी की भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

राजनीति में आ सकता है भूचाल
हाल ही में जितने भी मामले आयकर की जांच टीम के संज्ञान में आए हैं, सभी में प्रवर्तन निदेशालय की टीम की उपस्थिति चल रही है, ऐसे में अब इस कार्रवाई से सीधे को भी यादव सिंह की कार्रवाई से सीधे जोड़कर देखा जा रहा है. ऐसे में ये उम्मीद जताई जा रही है, कि जैसे ही इस मामले में शिंकजा कसा जाएगा, कई और राजनीतिक दलों के नेताओं के नाम सामने आने लगेंगे, जो उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया भूचाल ला सकते हैं, क्योंकि ब्रजपाल की राजनीतिक गलियारों में अच्छी पैठ मानी जा रही है.

अब आगे क्या होगा

1- बृजपाल को अब कई सवालों के जवाब देने होंगे.
2- बृजपाल के खिलाफ इनकम टैक्स ने 7 जून को सर्वे किया था.
3- अबतक के सर्वे में बृजपाल की 25 संपत्तियों की जानकारी मिली थी.
4- इसके साथ ही बृजपाल के दो बैंक लॉकर्स का पता भी चला था.
5- राजनीतिक कनेक्शन से लेकर प्राधिकरण में बृजपाल के रसूख के साक्ष्य मिले थे.

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Thursday, 14 June 2018

हजारों फीट ऊपर आसमान में था प्लेन, तभी पायलट को पड़ गया दौरा

नई दिल्ली: गंतव्य पर पहुंचने से पहले ही एक फ्लाइट में सफर कर रहे यात्रियों और केबिन क्रू की जान उस वक्त खतरे में पड़ गई जब प्लेन के को-पायलट को अचानक मिर्गी का दौरा पड़ गया. हालांकि, प्लेन कमांडर और सीनियर कैबिन सहायक की तत्परता से कोई स्थिति को समय रहते काबू में कर लिया गया और प्लेन की सुरक्षित लैंडिंग संभव हो पाई. को-पायलट को अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें तीन घंटे बाद छुट्टी दे दी गई.

हवा में था प्लेन तभी को-पायलट को पड़ा दौरा
बीबीसी में प्रकाशित खबर के अनुसार, ये पूरी घटना पिछले साल पांच अगस्त की है. इस घटना से संबंधित रिपोर्ट अब जारी की गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, घटना वाले दिन फ्लाईबी की फ्लाइट यात्रियों को लेकर स्कॉटलैंड के इनवर्नेस की ओर जा रही थी. बीच में ही अचानक प्लेन को ऑपरेट कर रहे को-पायलट का शरीर अकड़ने लगा. कंट्रोल पर से उनका नियंत्रण छूटा तो, प्लेन बुरी तरह से झटके खाने लगा.

प्लेन कमांडर और सीनियर स्टाफ ने संभाली स्थिति
प्लेन कमांडर ने तुरंत प्लेन के कंट्रोल संभाले और उसे स्थिर किया. प्लेन के झटके खाने से एक क्रू मेंबर को चोट पहुंची, जिसकी यात्रियों ने मदद की. इस बीच सीनियर कैबिन सहायक तुरंत कॉकपिट की ओर गईं. उन्हें हालात समझने में देर नहीं लगी. उन्होंने तुरंत को-पायलट को कंट्रोल पैनल से दूर किया और उनके हाथ पैर पकड़ लिए. इसके ठीक बाद को-पायलट को दूसरा दौरा पड़ा जो ज्यादा तेज था.

रिपोर्ट में बताया गया कि स्टाफ और पायलट की सूझबूझ से किसी भी अनहोनी को टालने में सफलता मिल सकी. यही वजह रही कि किसी भी पैसेंजर को इस घटना में कोई चोट नहीं पहुंची.

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Monday, 11 June 2018

अमेरिका ने उत्तर कोरिया से कहा- पूरी सुरक्षा की गारंटी देंगे, लेकिन ये है शर्त

सिंगापुर: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग- उन के बीच 12 जून(मंगलवार) को होने वाली ऐतिहासिक शिखर वार्ता से पहले अमेरिका ने 11 जून(सोमवार) को उत्तर कोरिया को पेशकश की कि यदि वह ‘पूर्ण, सत्यापित और अपरिवर्तनीय परमाणु निरस्त्रीकरण’ को स्वीकार करता है तो अमेरिका उसे ‘‘विशिष्ट’’ सुरक्षा गारंटी देगा. सेंटोसा द्वीप के कैपेला होटल में ट्रंप और किम की शिखर वार्ता की पूर्व संध्या पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि कल किम के साथ होने वाली ‘‘ बहुत दिलचस्प मुलाकात’’ से ‘‘अच्छे’’ नतीजों पर पहुंचा जा सकता है.

विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा कि तैयारियों को लेकर बातचीत बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है
बाद में अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा कि तैयारियों को लेकर बातचीत बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है और उन्हें अमेरिका के अनुमान से भी अधिक ‘‘तार्किक निष्कर्ष’’ पर पहुंचने की उम्मीद है. पोम्पियो ने यहां प्रेस कांफ्रेंस में बताया , ‘‘उत्तर कोरिया का पूर्ण, सत्यापित और अपरिवर्तनीय परमाणु निरस्त्रीकरण ही इस शिखर वार्ता का एकमात्र नतीजा है जो अमेरिका को स्वीकार्य होगा.’’ उन्होंने कहा कि अमेरिका पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के लक्ष्य को हासिल करने के लिए उत्तर कोरिया को ‘‘विशिष्ट’’ सुरक्षा गारंटियों की पेशकश करने के लिए तैयार है जो ‘‘मौलिक तौर पर पहले से भिन्न होंगे.’’

राष्ट्रपति ट्रंप का मानना है कि किम के पास अभूतपूर्व मौका है
पोम्पियो ने कहा, ‘‘हम ऐसे कदम उठाएंगे जिससे उन्हें यह इत्मीनान हो सके कि परमाणु निरस्त्रीकरण कुछ ऐसा नहीं है जिससे उन्हें कोई नुकसान हुआ है.’’ हालांकि, उन्होंने कहा कि परमाणु निरस्त्रीकरण का लक्ष्य हासिल होने तक उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध लगे रहेंगे. पोम्पियो ने कहा, ‘‘राष्ट्रपति ट्रंप का मानना है कि किम के पास अभूतपूर्व मौका है कि वह हमारे रिश्तों की दिशा बदल दें और अपने देश में शांति एवं समृद्धि कायम करें.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमारे दोनों नेताओं के आमने- सामने बैठने का तथ्य इस बात का संकेत है कि कुछ हासिल करने की अपार संभावनाएं हैं जिससे हमारे लोगों और समूची दुनिया को बहुत लाभ होंगे.’’

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भारत ने BRI में शामिल होने से किया इनकार, SCO समिट में अकेले जताया विरोध

चिंगदाओ (चीन): चीन की महत्वाकांक्षी ‘ एक क्षेत्र एक सड़क ’ (ओबीओआर) पहल का भारत द्वारा निरंतर विरोध किए जाने का स्पष्ट संदेश देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि बड़ी सम्पर्क सुविधा परियोजनाओं में सदस्य देशों की संप्रभुता और अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए. साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि समावेशिता सुनिश्चित करने वाली सभी पहलों के लिए भारत की ओर से पूरा सहयोग मिलेगा. पीएम मोदी यहां शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के 18 वें शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए दो दिन की यात्रा पर आए थे.

पीएम मोदी ने रविवार को यहां संक्षिप्त नाम ‘ सिक्योर ’ के रुप में एक नई अवधारणा रखी. इसमें ‘ एस ’ से आशय नागरिकों की सिक्योरिटी (सुरक्षा), ‘ ई ’ से इकोनामिक डेवलपमेंट (आर्थिक विकास), ‘ सी ’ से क्षेत्र में कनेक्टिविटी (संपर्क), ‘ यू ’ से यूनिटी (एकता), ‘ आर ’ से रेसपेक्ट फॉर सोवरनिटी एंड इंटेग्रिटी (संप्रभुता और अखंडता का सम्मान) और ‘ ई ’ से तात्पर्य एनवायर्मेंटल प्रोटेक्शन (पर्यावरण सुरक्षा) है.

अफगानिस्तान को आतंकवाद के प्रभावों का ‘ दुर्भाग्यपूर्ण उदाहरण ’ बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने देश में शांति के लिए जो साहसिक कदम उठाए हैं , क्षेत्र में सभी लोग इसका सम्मान करेंगे. उन्होंने इसी क्रम में ईद के मौके पर अफगानी नेता द्वारा संघर्ष विराम की घोषणा का भी उल्लेख किया.  अधि़कारियों ने कहा कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सहित सभी एससीओ सदस्यों ने आतंकवाद एवं अतिवाद के खतरों के बारे में चर्चा की और इसके समाधान के लिए ठोस कार्रवाई योजना शामिल करने की बात कही.


'विकास के लिए संपर्क सुविधाओं को महत्वपूर्ण कारक'
पीएम मोदी ने क्षेत्र के आर्थिक विकास के लिए संपर्क सुविधाओं को एक महत्वपूर्ण कारक बताया. चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग की मौजूदगी में पीएम मोदी ने कहा कि भारत चाबहार बंदरगाह और अशगाबाद (तुर्कमेनिस्तान) समझौते के साथ - साथ अंतरराष्ट्रीय उत्तर - दक्षिण परिवहन गलियारा परियोजना में शामिल है. यह संपर्क सुविधा के विकास की परियोजनाओं में भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है.

ओबीओआर के संदर्भ पीएम मोदी ने कहा , ‘भारत ऐसी परियोजना का स्वागत करता है जो समावेशी , मजबूत और पारदर्शी हो और जो सदस्य देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करती हो.’

ओबीओआर का विरोध करता रहा है भारत
उल्लेखनीय है कि भारत ओबीओआर का लगातार कड़ा विरोध करता रहा है क्योंकि यह पाकिस्तान के कब्जे वाले विवादित कश्मीर से होकर गुजरती है. भारत को छोड़कर एससीओ के सभी देशों ने चीन की इस योजना का समर्थन किया है. पीएम मोदी ने कहा कि संपर्क का मतलब सिर्फ भौगोलिक जुड़ाव से नहीं है बल्कि लोगों का लोगों से जुड़ाव भी होना चाहिए. भारत खुले द्वार की नीति का स्वागत करता है.

उल्लेखनीय है कि अंतरराष्ट्रीय उत्तर - दक्षिण परिवहन गलियारा 7,200 किलोमीटर लंबी कई देशों से होकर गुजरने वाली परियोजना है. यह परियोजना भारत , ईरान , अफगानिस्तान , आर्मेनिया , अजरबेजान , रूस , मध्य एशिया और यूरोप को एक मालवहन गलियारे के रुप में जोड़ेगी. अशगाबाद समझौता कई खाड़ी और मध्य एशियाई देशों के बीच परिवहन सुविधाओं के विस्तार और निवेश का समझौता है.

'भौतिक और डिजिटल संपर्क भूगोल की परिभाषा बदल रहा है'
पीएम मोदी ने कहा, ‘हम एक बार फिर उस पड़ाव पर पहुंच गए है जहां भौतिक और डिजिटल संपर्क भूगोल की परिभाषा बदल रहा है. इसलिए हमारे पड़ोसियों और एससीओ क्षेत्र में संपर्क हमारी प्राथमिकता है.’ उन्होंने कहा कि भारत एससीओ के लिए हर तरह का सहयोग देना पसंद करेगा , क्योंकि यह समूह भारत को संसाधनों से परिपूर्ण मध्य एशियाई देशों से दोस्ती बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है.

पाकिस्तानी राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने यहां अपने संबोधन में ओबीओआर का खुल कर समर्थन किया. साथ ही कहा कि चीन - पाकिस्तान आर्थिक गलियारा पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा.

भारत और पाकिस्तान के इस संगठन का पूर्ण सदस्य बनने के बाद यह पहला मौका है जब भारतीय प्रधानमंत्री इस शिखर सम्मेलन में भाग लेने आए हैं. इस संगठन में चीन और रूस का दबदबा है.  पीएम मोदी ने कहा कि इस शिखर सम्मेलन का जो भी सफल निष्कर्ष होगा , भारत उसके लिए अपना पूर्ण सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है. सम्मेलन के दौरान अपने संबोधन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने संयुक्त परियोजनाओं के लिए एससीओ को 30 अरब युआन यानी 4.7 अरब डॉलर का ऋण देने की भी घोषणा की.

एससीओ में अभी आठ सदस्य देश है जो दुनिया की करीब 42% आबादी और वैश्विक जीडीपी के 20% का प्रतिनिधित्व करता है. पीएम मोदी के अलावा इस शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग , रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन , ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति ममनून हुसैन भी शामिल हुए हैं.

वर्ष 2001 में स्थापित इस संगठन के भारत के अलावा रूस , चीन , किर्गीज गणराज्य , कजाकिस्तान , ताजिकिस्तान , उज्बेकिस्तान और पाकिस्तान सदस्य हैं.

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Thursday, 31 May 2018

एयर इंडिया में विनिवेश पर फिर से विचार कर सकती है सरकार, कांग्रेस ने किया कटाक्ष

नई दिल्ली : एयर इंडिया का कोई खरीददार नहीं मिलने पर सरकार ने फिर से विनिवेश की रणनीति बनाने पर विचार कर रही है. नागर विमानन मंत्रालय ने कहा कि उसे एयर इंडिया की हिस्सेदारी बिक्री प्रक्रिया में बेहतर भागीदारी की उम्मीद थी. मंत्रालय ने संकेत दिया है कि विनिवेश के लिए शुरुआती बोलियां नहीं मिलने के बाद अब हिस्सेदारी बिक्री की रणनीति पर नए सिरे से विचार किया जा सकता है. उधर, विनिवेश में विफल होने पर कांग्रेस ने सरकार पर कटाक्ष किया है.

वहीं एयर इंडिया की कर्मचारी यूनियनों ने एयरलाइन के रणनीतिक विनिवेश के लिए कोई बोली नहीं मिलने को अपनी जीत बताया है. एयर इंडिया यूनियनों के संयुक्त मंच ने बयान में कहा, ‘एयर इंडिया के लिए कोई बोली नहीं मिली. यह एयरलाइन को बचाने के संयुक्त मंच के प्रयासों की जीत है.’

एयर इंडिया की रणनीतिक हिस्सेदारी बिक्री के लिए रुचि पत्र देने की समयसीमा 31 मई को समाप्त हो गई. नागर विमानन सचिव आरएन चौबे ने कहा, ‘हम आगे बेहतर भागीदारी की उम्मीद कर रहे हैं.’

चौबे ने कहा कि वित्त मंत्री की अगुवाई वाली वैकल्पिक व्यवस्था के तहत एयर इंडिया के विनिवेश के लिए भविष्य की कार्रवाई तय की जाएगी. हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार नहीं चाहेगी कि एयरलाइन की बाजार हिस्सेदारी कम हो. रुचि पत्र देने की समयसीमा समाप्त होने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में चौबे ने संकेत दिया कि विनिवेश की रणनीति पर नए सिरे से विचार किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि ताजा घटनाक्रमों से एयरलाइन को परिचालन में किसी तरह की दिक्कतें नहीं आएं.

उधर, इस मामले में कांग्रेस ने बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार का मखौल उड़ाया और कहा कि मौजूदा सरकार को कंपनी के पुनर्निर्माण के लिए धन देना चाहिए. पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने कहा कि सरकार को राष्ट्रीय विमानन कंपनी का जिम्मा कर्मचारी सहकारी समिति को सौंप देना चहिए.

सरकार की घोषणा के बाद मनीष ने ट्वीट किया, ‘पांच लाख करोड़ की एयर इंडिया को घनिष्ट मित्रों को कौड़ियों के दाम बेचने का सरकार का प्रयास धराशाही हो गया. एक भी बोली नहीं आई. क्यों नहीं सरकार इसे बाबुओं की बजाए कर्मचारी सहकारी समिति को सौंप देती. वहीं मुंबई कांग्रेस प्रमुख संजय निरूपम ने एयरलाइन के स्टॉफ को बधाई दी और कहा कि उनकी लड़ाई रंग लाई.

Source:-Zeenews

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ISRO बताएगा कितने लोगों ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस में हिस्सा लिया

नई दिल्लीः आगामी 21 जून को आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर देश भर में आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लेने वाले लोगों की संख्या का पता करने में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की मदद ली जायेगी. आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्यराज कटोचा ने बुधवार संवाददाता सम्मेलन में चौथे अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन की व्यापक तैयारियों की जानकारी देते हुये बताया कि इस बार इसरो की भी मदद ली जा रही है. कटोचा ने कहा ‘‘हमने इसरो से मदद मांगी है जिसे स्वीकृति मिल गयी है. इसमें हमने कहा है कि देश भर में योग दिवस के कार्यक्रम खुले आयोजित होते हैं, इसलिये आयोजनों में हिस्सा लेने वालों की संख्या का मैपिंग के जरिये पता लगाना आसान होगा.’’

उन्होंने कहा कि इस कवायद की कार्ययोजना इसरो के साथ तैयार की जा रही है. इसरो ने मंत्रालय को भरोसा दिलाया है कि योग दिवस की मैपिंग करना संभव है और आयोजन के बाद अगले 24 घंटे में इसकी रिपोर्ट भी दी जा सकती है. कटोचा ने बताया कि चौथे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का मुख्य आयोजन इस साल देहरादून में आयोजित होगा. इससे पहले दिल्ली, चंडीगढ़ और लखनऊ में मुख्य आयोजन हो चुके हैं.

आयुष मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव रंजीत कुमार ने बताया कि इस बार योग ग्राम योजना भी शुरु की जायेगी. इसमें प्रत्येक प्रखंड में कम से कम एक ऐसा गांव बनाने का प्रस्ताव है जिसके प्रत्येक परिवार का कम से कम एक सदस्य योगाभ्यास करता हो. इसके तहत आयुष मंत्री श्रीपद नायक ने पंचायतों को पत्र लिखकर योग दिवस में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेने के लिये लोगों को प्रेरित करने की अपील की है.

कुमार ने बताया कि राजस्थान सरकार कोटा में योगगुरु बाबा रामदेव की अगुवायी में अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस मनाएगी. इसमें मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी उनके साथ शिरकत करेंगी. उन्होंने बताया कि मंत्रालय की ओर से 22 सदस्यीय दल खास तौर पर चीन भेजा गया है. यह दल चीन के अलग अलग इलाकों में जाकर योग के लिए लोगों को प्रेरित करेगा.

Source:-Zeenews

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Friday, 25 May 2018

27 जून से शुरू होने वाली है अमरनाथ यात्रा, आज सेना प्रमुख लेंगे सुरक्षा का जायजा

श्रीनगर : सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत आज (25 मई) अमरनाथ यात्रा का जायजा लेने के लिए कश्मीर में होंगे. 27 जून से शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा के लिए सेना और प्रशासन द्वारा कैसे सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं, बिपिन रावत इसके बारे में जानेंगे. माना जा रहा है कि अपने इस दौरे पर बिपिन रावत अमरनाथ यात्रा में स्थानीय लोगों का सहयोग सेना कैसे ले सकती है इस पर भी चर्चा कर सकते हैं.

कश्मीर में सेना बल से की मुलाकात
गुरुवार(24 मई) को सेना प्रमुख कश्मीर पहुंचे थे और वहां पर उन्होंने मौजूदा स्थिति का जायजा लिया. श्रीनगर स्थित रक्षा प्रवक्ता कर्नल राजेश कालिया ने एक बयान में कहा, 'सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कश्मीर घाटी का दौरा कर मौजूदा सुरक्षा स्थिति का जायजा लिया.'

कालिया ने कहा कि सेना प्रमुख के साथ चिनार कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल ए के भट भी थे.प्रवक्ता ने बताया कि रावत ने कोर मुख्यालय और इकाईयों का दौरा किया. वहां पर कमांडरों ने उन्हें संचालन तैयारियों के बारे में अवगत कराया.

27 जून से शुरू हो रही है अमरथान यात्रा
बता दें कि इस साल अमरनाथ यात्रा 27 जून से शुरू होने वाली है. कुछ वक्त पहले अमरनाथ यात्रा के बारे में जानकारी देते हुए श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के चेयरमैन व राज्यपाल एनएन वोहरा ने कहा था कि 27 जून 2018 से इस बार अमरनाथ यात्रा शुरू हो रही है. उन्होंने कहा था कि 60 दिनों तक चलने वाली अमरनाथ यात्रा के लिए लोगों को पहले से पंजीकरण करना होगा.

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Thursday, 24 May 2018

मप्र: किसान आंदोलन ले सकता है सांप्रदायिक रंग, शिवराज सरकार की उड़ी नींद

जबलपुर: मध्‍यप्रदेश में मंदसौर गोलीकांड की बरसी पर किसान संगठनों ने एक से दस जून तक आंदोलन करने की घोषणा की गई है. मध्य प्रदेश में 2 अक्टूबर को भारत बंद के दौरान भड़की हिंसा को मद्देनजर रखते हुए शिवराज सरकार प्रस्तावित किसान आंदोलन को लेकर अलर्ट हो गई है. इसी बीच किसान आंदोलन को लेकर सरकार के सामने आई नई इंटेलिजेंस रिपोर्ट ने सरकार की नींद उड़ा दी है. नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि किसान आंदोलन सांप्रदायिक रंग ले सकता है. 

इस रिपोर्ट के बाद अगर ऐसा होता है तो चुनावी साल में प्रदेश की शांति भंग हो सकती है. किसान आंदोलन की आड़ में असामाजिक तत्व साम्प्रदायिक हिंसा फैला सकते हैं. रमजान के चलते सरकार के हाथ पैर फूले हुए हैं. आईजी इंटेलिजेंस मकरंद देउस्कार ने जी-एमपी सीजी को दी एक्सलूसिव जानकारी में कहा कि सभी एसपी को साम्प्रदायिक हिंसा के लिए अलर्ट किया गया है.

आंदोलन का व्‍यापक असर होगा
बीजेपी कहना है कि प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार किसानों के लिए कई योजनाएं चला रही है, लेकिन कांग्रेस किसानों भड़का कर माहौल बिगाड़ना चाहती है. वहीं इंटेलीजेंस की रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन ने होशंगाबाद, हरदा, नरसिंहपुर, मंदसौर, नीमच, इंदौर, धार, उज्जैन, देवास, शुजालपुर, आगर-मालवा, रतलाम, खंडवा, खरगौन को अतिसंवेदनशील इलाकों की लिस्ट में रखा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि मालवा-निमाड़ इलाके में ग्रामबंद का व्यापक असर हो सकता है.

किसानों से बहकावे में न आने की अपील
मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने कहा है कि किसान संगठनों के आंदोलन में हिंसा जैसी स्थिति से बचने के लिए सरकार ने सभी मंत्रियों, विधायकों, सांसदों, बीजेपी पदाधिकारियों को प्रदेश में अपने प्रवास के दौरान किसानों से आंदोलन में शामिल नहीं होने की अपील करने को कहा है.

Source:-Zeenews

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Friday, 18 May 2018

मनरेगा के मजदूरों के भुगतान में देरी स्वीकार्य नहीं, लाल फीताशाही का बहाना नहीं चलेगाः सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने आज (शुक्रवार) कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के तहत मजदूरी के भुगतान में कोई विलम्ब स्वीकार्य नहीं है और इसमें लाल फीताशाही का बहाना नहीं बनाया जा सकता. न्यायालय ने उल्लेख किया कि केंद्र ने मजदूरी के भुगतान में विलम्ब की बात स्वीकार की है और कहा कि मनरेगा के तहत काम करने वालों को भुगतान तत्काल किया जाना चाहिए तथा ऐसा न किए जाने पर एक निर्धारित मुआवजा देना पड़ेगा.

शीर्ष अदालत ने कहा कि किसी भी मजदूर को काम पूरा होने के एक पखवाड़े के भीतर अपना भुगतान पाने का अधिकार है और यदि कोई प्रशासनिक अक्षमता या खामी है तो यह पूरी तरह राज्य सरकारों और ग्रामीण विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी है कि वे समस्या का समाधान करें.

न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति एनवी रमण की पीठ ने कहा कि कानून के प्रावधानों का अनुपालन कराने का दायित्व राज्य सरकारों, केंद्रशासित प्रशासनों तथा केंद्र का है तथा कोई एक-दूसरे पर जिम्मेदारी नहीं थोप सकता. पीठ ने कहा, ‘‘उपरोक्त के मद्देनजर हम केंद्र सरकार को निर्देश देते हैं कि वह ग्रामीण विकास मंत्रालय के माध्यम से राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रशासनों के साथ परामर्श कर श्रमिकों की मजदूरी और मुआवजे के भुगतान के लिए तत्काल एक समयबद्ध कार्यक्रम तैयार करे.’’

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न्यायालय ने कहा कि मनरेगा के तहत मजदूरी के भुगतान में कोई विलम्ब स्वीकार्य नहीं है और इसमें लाल फीताशाही का बहाना नहीं बनाया जा सकता है.

Source:-Zeenews

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Monday, 23 April 2018

मेघालय से पूरी तरह और अरुणाचल से आंशिक रूप से हटाया गया AFSPA

नई दिल्ली: मेघालय से सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (आफस्पा) को पूरी तरह हटा लिया गया है, जबकि अरूणाचल प्रदेश में अब यह असम सीमा से लगे आठ थाना क्षेत्रों और पड़ोसी म्यांमार से लगे तीन जिलों में लागू रहेगा. सशस्त्र बल (विशेषाधिकार) कानून 31 मार्च से मेघालय के सभी क्षेत्रों से हटा लिया गया है. यह कानून सुरक्षा बलों को बिना वारंट के ही तलाशी अभियान चलाने और किसी को भी कहीं से भी गिरफ्तार करने की शक्ति देता है.

सुरक्षा हालात में सुधार की वजह से लिया गया फैसला
गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य में सुरक्षा हालात में उल्लेखनीय सुधार की वजह से यह फैसला किया गया है. अधिकारियों ने बताया कि अरूणाचल प्रदेश में अब यह विवादित कानून असम सीमा से लगे 16 थाना क्षेत्रों से घटकर आठ थाना क्षेत्रों में लागू रहेगा. इसके अलावा यह तिरप, चांगलांग और लांगडिंग जिलों में भी लागू रहेगा.

एक अधिकारी ने बताया कि गृह मंत्रालय ने नगालैंड , मिजोरम और मणिपुर के प्रोटेक्टेड एरिया परमिट रेजीम में पांच वर्ष के लिए ढ़ील देने का निर्णय किया है जो कि एक अप्रैल से प्रभावी है.  विदेशी ( प्रतिबंधित क्षेत्र ) आदेश 1958 के अनुसार कुछ राज्यों के इनर लाइन तथा अंतरराष्ट्रीय सीमा में पड़ने वाले सभी क्षेत्र निषेध क्षेत्र घोषित हैं.

इस निषेध क्षेत्र में वर्तमान में पूरा अरूणाचल प्रदेश , मणिपुर , मिजोरम , नगालैंड और सिक्किम आते हैं इसके अलावा हिमाचल प्रदेश , राजस्थान , उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर के कुछ क्षेत्र शामिल हैं. सिक्किम का कुछ भाग निषेध क्षेत्र में तथा शेष प्रतिबंधित क्षेत्र में आता है. एक अन्य अधिकारी ने बताया कि , ‘‘ अन्य क्षेत्रों से पीएपी हटाने पर विचार किया जा रहा है. ’’  पाकिस्तान , चीन और अफगानिस्तान से आने वाले लोगों पर अभी भी पीएपी क्षेत्र में जाने पर पाबंदी है . इसमें नगालैंड , मिजोरम तथा मणिपुर भी शामिल है.

दिशानिर्देशों के अनुसार किसी विदेशी नागरिक को आमतौर पर निषिद्ध अथवा प्रतिबंधित क्षेत्र में आने की अनुमति तब तक नहीं होती जब तक कि सरकार इस बात से संतुष्ट नहीं हो जाती कि उसके वहां जाने के पीछे कोई बहुत बड़ा कारण है. हालांकि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार समय समय पर अधिसूचना जारी करके कुछ ऐसे क्षेत्रों को निषेध अथवा प्रतिबंधित से छूट देती है.


Source:-Zeenews

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CJI पर महाभियोग का नोटिस खारिज, सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकती है कांग्रेस

नई दिल्ली: प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ दिए गए महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस को राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने सोमवार (23 अप्रैल) को ठुकरा दिया है. ऐसे में अब उम्मीद की जा रही है कि कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है. कांग्रेस नेता पहले ही इस बारे में अपनी राय जाहिर कर चुके हैं. पार्टी के एक नेता ने कहा था, ‘‘सभापति के फैसले को चुनौती दी जा सकती है. इसकी न्यायिक समीक्षा हो सकती है.’’ उन्होंने कहा था कि कांग्रेस इस उम्मीद के साथ प्रधान न्यायाधीश पर ‘नैतिक दबाव’ बना रही है कि महाभियोग प्रस्ताव पेश किए जाने पर वह अपने न्यायिक उत्तरदायित्व से अलग हो जाएंगे.

कांग्रेस के एक नेता ने कहा था कि पहले भी महाभियोग का सामना करने वाले न्यायाधीश न्यायिक कार्य से अलग हुए थे और प्रधान न्यायाधीश को भी यही करना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘‘यह सिर्फ परिपाटी है, इसके लिए कोई कानूनी या संवैधानिक बाध्यता नहीं है

संविधान विशेषज्ञों ने किया था प्रस्ताव का विरोध
संवैधानिक विशेषज्ञों ने बीते 20 अप्रैल को कहा था कि कांग्रेस नीत विपक्ष का देश के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा को पद से हटाने की कार्यवाही शुरू करने के लिये दिये गए नोटिस से राजनीति की बू आती है और यह संसद में पारित नहीं हो पाएगा. विशेषज्ञों का मानना था कि यह फैसला न तो शक्तियों का दुरूपयोग है और न ही कोई कदाचार है.

महाभियोग के कदम 'न्यायपालिका की स्वतंत्रता' के लिए खतरा
महाभियोग के कदम को प्रमुख विधिवेत्ता जैसे सोली सोराबजी, उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीशों एस एन ढींगरा और अजित कुमार सिन्हा और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने ‘प्रेरित’ और ‘राजनीतिक’ बताया. अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली तत्कालीन राजग सरकार के दौरान अटॉर्नी जनरल रहे सोराबजी ने प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ पद से हटाने की कार्यवाही शुरू करने का नोटिस देने के लिए तीखा हमला बोला और कहा, ‘न्यायपालिका की स्वतंत्रता के साथ यह सबसे खराब बात हो सकती है.’ उन्होंने कहा कि यह घटना लोगों के मन में न्यायपालिका में विश्वास और भरोसे को हिला देगी.

सीजेआई पर प्रस्ताव 'आत्मघाती कदम'
सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश रेड्डी ने कहा, "महाभियोग प्रस्ताव लाने वाले राजनीतिक दलों के लिए यह आत्मघाती कदम है." उन्होंने दावे के साथ कहा, "प्रथम दृष्टया प्रधान न्यायाधीश पर किसी कदाचार का आरोप तय करने के लिए कोई साक्ष्य नहीं है." उन्होंने कहा कि अनियमितता से कदाचार तय नहीं होता है.

7 दलों ने दिया था महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस
बीते 20 अप्रैल को कांग्रेस और छह अन्य विपक्षी दलों ने देश के प्रधान न्यायाधीश पर ‘कदाचार’ और ‘पद के दुरुपयोग’ का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस दिया था. महाभियोग प्रस्ताव पर कुल 71 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए थे, जिनमें सात सदस्य सेवानिवृत्त हो चुके हैं. महाभियोग के नोटिस पर हस्ताक्षर करने वाले सांसदों में कांग्रेस, राकांपा, माकपा, भाकपा, सपा, बसपा और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के सदस्य शामिल थे. यह कदम प्रधान न्यायाधीश के नेतृत्व वाली उच्चतम न्यायालय की एक पीठ द्वारा उन याचिकाओं को खारिज किये जाने के एक दिन बाद आया है, जिनमें विशेष सीबीआई न्यायाधीश बी एच लोया की मृत्यु की स्वतंत्र जांच की मांग की गई थी.

Source:-Zeenews

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